लॉकडाउन में नही मिला खाने को तो जंगल का तेंदु खाकर 10 दिन गुजार दिए तीन परिवार के 11 लोग, बच्चे भी हैं शामिल!

सभी बस से सिटिपाथर पहुंचे, वहां से 9 किमी पैदल चल कोरिया गढ़ पहुंच गए, जब पूजा पाठ कर उतरे तो उन्हें पता चला कि आने जाने के सभी साधन पूरी तरह से बन्द हो चुके हैं। थोड़ा बहुत चावल साथ लेकर आये जो बच्चों को किसी तरह खिलाया, बाकी महिला पुरुष उपवास पर थे। रामनवमी खत्म होते ही उन्हें भूख बर्दास्त नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने ग्राम दुग्गी के एक ग्रामीण को अपनी पूरी जानकारी दी।

पाराडोल निवासी राजेश, खैरबना निवासी रामसिंह और समुंदर का कहना है कि, अब हम लोग कहां जाएं, अब तो यही फंस गए हैं, जो थोड़ा बहुत चावल था वो खत्म हो गया है। घर जा नहीं सकते, इसी गुफा में हम लोग दिन काट रहे हैं। हम लोगों को खाने की व्यवस्था की मदद कोई कर दे। ताकि हमारे छोटे छोटे बच्चे भूखे न रह सके।

फंसे परिवार से समुंदर ने बताया कि, वो खुद सरपंच से मिला था और उसे अपनी परेशानी बताया था, तब सरपंच ने कहा था कि, वो उनकी सुध लेने आएगा, पर आज तक वो नहीं आया। गुफा में फंसे परिवारों के पास सबसे आधार कार्ड और राशन कार्ड भी है, परंतु नहीं है तो खाने के लिए अनाज, रामसिंह की माने तो एक दो दिन से तेंदू जंगल में मिल रहा है, इसके अलावा और कुछ भी खाने को नहीं है।
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