कोविड-19 को काबू में करने वाले भीलवाड़ा गाँव का क्रेडिट लेने की राहुल गाँधी ने की कोशिश तो गाँव की सरपंच ने सिखाया सबक

सबसे पहले जिले के हर व्यक्ति को बंदी की स्थिति में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित की गई, फिर सर्दी-जुकाम से पीड़ित लोगों तक की कोरोना के संदिग्ध मरीज होने के शक में गहन जांच की गई। इसी के साथ इस जिले को सील भी कर दिया।
 इस प्रकार बहुत कम समय में ही अपने जिले के लगभग सभी पच्चीस लाख लोगों की कोरोना जांच करके उसमें से संक्रमित रोगियों को छांट कर, उन्हें अलग कर उनका समुचित इलाज किया गया। इस पूरी कवायद के सुखद परिणाम आए। चार अप्रैल, 2020 के बाद आज तक भीलवाड़ा में एक भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति नहीं मिला है।
भीलवाड़ा का यह प्रयास भारत जैसे राष्ट्र-राज्य के लिए एक बड़ी मिसाल है। भीलवाड़ा जैसा राजस्थान का एक गुमनाम-सा जिला अज सबके लिए एक नजीर बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत ने भीलवाड़ा मॉडल को अपनाते हुए काम नहीं किया तो यहां कोरोना इटली जैसी तबाही मचा सकता है
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