खुफिया विभाग और डॉक्टरों ने किया था आगाह पर डोनाल्ड ट्रंप नहीं समझ पाएं...अमेरिका में गईं 20 हजार से भी ज्यादा जानें

अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट की मानें तो एक हेल्थ वर्कर ने काफी पहले ही पैनिक बटन दबा दिया था, लेकिन सरकार उनका इशारा समझ नहीं पाई और नतीजा यह है कि ट्रंप अपने से कमजोर देशों के सामने हाथ फैलाए खड़े हैं। डॉक्टर की चेतावनी जिसकी अनदेखी पड़ गई भारी। 

जनवरी में डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स की सीनियर मेडिकल अडवाइजर डॉ. कार्टर मर्चर ने अलर्ट करते हुए चिट्ठी लिखी थी, 'अगर आप इसे (प्रॉजेक्ट) छोटा करते हैं, यह बुरा होने जा रहा है। कोरोना से लड़ने की परियोजना की साइज पर भरोसा करना मुश्किल है।' उन्होंने यह चिट्ठी 28 जनवरी को नौकरशाहों को लिखी थी , जब देश में कोरोना का पहला केस सामने आ चुका था। 

हालांकि, ट्रंप को फैसला लेने में 6 सप्ताह का वक्त लग गया तब तक कोरोना में बड़ा संकट पैदा कर चुका था। वह तब गिड़गिड़ा रही थीं जब ट्रंप ने ठीक जनवरी में ही कोरोना वायरस को बेहद छोटी समस्या बताया था और कहा था कि अमेरिका इससे निपट लेगा। उन्होंने न सिर्फ वायरस की गंभीरता को कम आंका बल्कि दूसरे मुद्दे पर काम करते रहे। यहां तक कि वाइट हाउस के विशेषज्ञ सलाहकार से लेकर खुफिया एजेंसियों ने खतरे को भांप लिया था लेकिन ट्रंप अनदेखी करते गए।
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