जुर्म न करने के चलते 23 साल कैद में रहे,लौटा तो नही बचे थे माँ बाप, लिपटकर रोने के लिए अब मां-बाप नहीं उनकी कब्र थी

कोर्ट से रिहा होने के पश्चात भट्ट श्रीनगर स्थित अपने घर लौटे और सबसे पहले माता-पिता की कब्र पर पहुंचे। वह अपने अम्‍मी अब्‍बू की कब्र पर जाकर रोए। भट्ट ने अपने माता-पिता को जेल में रहने के दौरान गंवा दिया था। 

भट्ट ने अपनी जिंदगी के ढाई दशक जेल में बिता दिए। मंगलवार को राजस्‍थान हाई कोर्ट ने 42 वर्ष के लतीफ अहमद बाजा, 48 साल के अली भट्ट, 39 साल के मिर्जा निसार, 57 साल के अब्‍दुल गोनी और 56 साल के रईस बेग को रिहा किया है। बेग को आठ जून 1997 को सजा सुनाई गई थी।

भट्ट पिछले 23 वर्षों से एक ऐसे जुर्म के लिए जेल में थे जो उन्‍होंने किया ही नहीं। जब वह जेल से बाहर आए तो पूरी दुनिया बदल चुकी थी। खुद उनकी दुनिया में कई बदलाव आ गए थे। भट्ट का एक वीडियो ट्वीटर पर शेयर हो रहा है और इस वीडियो को देखकर आपकी आंखों में भी आंसू आ जाएंगे।
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