लॉकडाउन में फंसे मजदूर लोग, 48 घंटे से नही मिला था खाना, 48 घंटे तक खाने के लिए इंतजार करवाता रहे हेल्पलाइन नंबर वाले, और फिर मिला भरोसा

 भूखे शिवचंद्र अपने साथियों के साथ खाना लेकर आने वाले उस मसीहा का इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी प्रतीक्षा लंबी होने वाली थी. शिवचंद्र यहां पर कुछ और लोगों के साथ रहते हैं, जो खटाल में काम करते हैं. शिवचंद्र कहते हैं कि उन्हें 3 से 4 किलोमीटर तक तो पैदल चलना पड़ता है ताकि अनाज खरीदा जा सके. वहां भी दुकानदार ऊंची कीमतों में सामान बेच रहा है.

इस खटाल में लगभग 80 लोग रहते हैं. कमोबेश सबकी हालत एक जैसी है. अशोक यादव जोगेश्वरी में सेल्समैन का काम करते हैं. सोमवार को अशोक और शिवचंद्र दिन भर खाना आने का इंतजार करते रहे, लेकिन उनका इंतजार अधूरा रहा. आखिरकार उनके पास जो कुछ राशन बचा था उसे उन्होंने बनाया और आपस में बांट कर आधा-आधा पेट खा लिया.

 शिवचंद्र और उनके साथियों ने पहला कॉल करने के 24 घंटे बाद बीएमसी के हेल्पलाइन पर फिर कॉल किया. फोन उठाने वाले शख्स ने जो जवाब दिया वो इस बीएमसी की इस हेल्पलाइन की गंभीरता को बताने के लिए काफी था. फोन उठाने वाले शख्स ने कहा, "चूंकि आज रविवार था इसलिए खाना नहीं भेजा जा सका, लेकिन अब निश्चित रूप से उन्हें खाना भेजा जा रहा है."

Image News Soure :- India Today
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