जमात के सदस्य से संक्रमित हुए कोरोना पीड़ित के शव को दफनाने पर बवाल, लॉकडाउन तोड़कर सड़को पर उतरे लोग, किया हंगामा, और फिर

संक्रमण के चलते मरने वाले 65 वर्षीय एक व्यक्ति के शव को दफनाए जाने की भनक लगते ही यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए और शव को दफनाने का विरोध करने लगे। विरोध कर रहे लोगों को कहना था कि इससे उनके बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न होगा।

 स्थिति को नियंत्रित करने मौके पर पहुंचे उपायुक्त राय महिमापत रे ने लोगों से बातचीत कर समझाया और वहां शव नहीं दफनाने की लोगों की मांग मान ली। बाद में शहर के पुलिस अधीक्षक अजीत पीटर डुंगडुंग ने लाउडस्पीकर से घोषणा की कि रातूरोड कब्रिस्तान पर मृतक को नहीं दफनाया जायेगा और लोग अपने-अपने घरों में चले जायें।

विरोधी लोगों का आरोप था कि जब मृतक हिंदपीढ़ी इलाके का रहने वाला था तो उसे रातू रोड में दफनाने के लिए क्यों लाया जा रहा है? बहरहाल, प्रशासन ने अभी यह नहीं स्पष्ट किया है कि अब मृतक को कहा दफन किया जाएगा। क्युकी अंतिम सूचना मिलने तक शव को नहीं दफनाया जा सका था।

आपको बता दें कि राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान रिम्स में भर्ती एक 65 वर्षीय व्यक्ति की रविवार तड़के मौत हो गई थी। जोकि तबलीगी जमात के सदस्य से संक्रमित हुआ था। इसके साथ ही राज्य में कोरोना वायरस के संक्रमण से मरने वालों की संख्या दो हो गई है जबकि 15 अन्य कोरोना संक्रमित हैं।
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