पिता चलाते थे चाय की दूकान, घर में खाने को नही राशन, बीमार पिता ने तोडा दम, बेबस बेटियों ने निभाया एक बेटे का फर्ज, मुंडन कराके पिता का किए पिंडदान

नुमाइश मैदान के सामने चाय की दुकान चलाने वाले 42 वर्षीय संजय गुप्ता की इलाज के अभाव में मौत हो गई थी।  वे नगला कलार में किराये के मकान में रह रहे थे। पिता की मृत्यु के बाद विवाहित बेटी काजल के अलावा राधा, मोना, हिमांशी व ज्योति ने अर्थी को कंधा देते हुए अंतिम संस्कार कराया था। हालांकि मुखाग्नि संजय के छोटे भाई नरेंद्र ने दी थी। 

सोमवार को इन बेटियों ने वो सारे फर्ज निभाए जिन्हें एक बेटा ही पूरा कराता है। बेटी राधा, मोना, हिमांशी व ज्योति ने मिलकर पिता संजय गुप्ता का पिंडदान व अपना मुंडन संस्कार कराया। इतना ही नहीं उन्होंने ङ्क्षहदू धर्म के अनुसार रीति-रिवाजों को भी पूरा किया। इस दृश्य को जिसने  भी देखा आंखें नम हो गईं। 

पापा ने कहा था,  बेटे से कम नहीं बेटियां  

बकौल बेटियां, पापा हमेशा कहते थे कि आजकल बेटा-बेटियों में कोई अंतर नहीं है। बेटा जो करता है, वह सारे काम बेटियां भी कर सकती हैं। इन बेटियों ने पापा की कही प्रत्येक बात को सच साबित किया और पिंडदान व मुंडन संस्कार कराया। इस दौरान उनकी मां अंजू गुप्ता व स्वजन भी मौजूद रहे। 
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