नोएडा से निकले थे अपने घर के लिए लेकिन क्या पता था की रास्ते में छूट जाएगा जीवनसाथी का साथ,रास्ते में हुई पिता की मौत, बिलखते रह गए दो मासूम

समाजसेवियों और स्थानीय पत्रकारों की मदद से शव को गंतव्य को भिजवाया गया जिला सिद्धार्थनगर के थाना बासी क्षेत्र के गांव वराहडा विनोद तिवारी पुत्र राममिलन तिवारी निवासी दिल्ली की नवीन विहार कॉलोनी में पिछले काफी समय से पत्नी व दो बच्चों के किराये के मकान में रहता था। वह बिस्किट, कुरकुरे आदि सामान के सेल्समैन के रूप में काम कर परिवार का भरण पोषण कर रहा था। विनोद पिछले तीन साल से मुंह के कैंसर से पीड़ित था। पिछले दिनों कोरोना के चलते देश में लॉक डाउन के बाद काम बंद हो गया। आय रुकने पर उसने घर लौटने का फैसला लिया। 
विनोद शुक्रवार की देर रात्रि पत्नी व दो बच्चों के साथ मोपेड से घर के लिये चल दिया। दूसरी मोपेड पर उसका भाई व परिवार भी था। सुबह लगभग 10 बजे सिकंदराराऊ में नगर पालिका के समीप विनोद की तबीयत बिगड़ गई। मोपेड रोकते ही वह जमीन पर गिर पड़ा। दूसरी मोपेड पर सवार भाई ने उपचार के लिये एंबुलेंस को फोन लगाया। आरोप है कि एंबुलेंस नहीं आई। कुछ ही देर में विनोद ने दम तोड़ दिया। सूचना पर पहुंचे कोतवाली प्रभारी प्रवेश राणा ने शव को निजी वाहन से सीएचसी भिजवाया। इसके बाद भी शव को सिद्धार्थनगर तक पहुंचाने में प्रशासन से मदद नहीं मिल सकी।
चार घंटे से ज्यादा विनोद का शव सीएचसी पर रखा रहा, लेकिन स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अफसरों ने कुछ नहीं किया। जब घंटों तक शव वहां रखा रहा तो स्थानीय समाजसेवी जयप्रकाश गुप्ता एडवोकेट और स्थानीय पत्रकारों ने 15 हजार रुपये एकत्रित करके एक मेटाडोर में शव को रखवाया और पत्नी व भाई को बिठाकर सिद्धार्थ नगर के लिये रवाना किया। मेटाडोर से जब शव भेजा जा रहा था तभी एसडीएम विजय शर्मा व सीओ डॉ. राजीव कुमार पहुंचे और आधा दर्जन लोगों को साथ जाने पर मना करने लगे। इस पर मृतक की पत्नी ने गुहार लगाते हुये कहा हम सब लोगों को एक साथ जाने दो नहीं तो परिजन मोपेड पर जाते समय रास्ते में मर जायेगे। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने उन्हें एक साथ जाने दिया।
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