लॉकडाउन में बंद हुआ काम, तो बेटी को दूध के लिए बिलखता देखकर दंपति ने शुरू किया ये काम, बेटी के लिय कभी-कभी भूखे पेट सोना पड़ता है

जिला अस्पताल में एक सड़क निर्माण में यह परिवार काम कर रहा था। मालती ने बताया कि लॉकडाउन होने से काम बंद हो गया और हम यहीं फंस गए। 

ठेकेदार ने दोनों को दो हजार रुपये देकर दोबारा सुध तक नहीं ली। मालती बताती हैं कि रुपये खत्म होने के बाद कई दिन भूखे पेट रहे। किसी ने भी उनकी समस्या को नहीं समझा। बड़ी बात यह है कि बेटी का बिना दूध के पेट नहीं भरता है। 

इसके लिए दंपति खेत मालिक से मिन्नते कर सोमवार से पास के खेतों में गेहूं कटाई का काम शुरू कर दिया। पति राजेश ने बताया कि कटाई में खेत मालिक हर रोज 150 रुपये देता है। 

हालांकि मजदूरी में प्रति दिन तीन सौ रुपये मिलते थे। जिला अस्पताल में तैनात पुलिस कर्मी सुबह के खाने की व्यवस्था कर देते हैं। दूसरे टाइम कभी-कभी भूखे पेट सोना पड़ता है। मालती व राजेश सहित गांव के आठ और मजदूर यहां फंसे हुए हैं। उनका भी कमोवेश यही हाल है।
close