किसी की आंखें नहीं है, तो कोई चल नहीं सकता...लेकिन उन्होंने हाथ नहीं फैलाए, भीख नहीं मांगी

इस समूह में 10-12 लोग हैं.. किसी को दिखाई नहीं पड़ता तो कोई सुन नहीं सकता.. किसी के बचपन से पैर नहीं है, किसी के हाथों ने उसका साथ छोड़ दिया है.. लेकिन जिंदगी से नहीं हारे. दूसरों से भीख नहीं मांगी.. एक साथ मिले और अपना काम शुरु कर दिया.. ये उनकी कहानी है..

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हजारीबाग (झारखंड)। दिव्यांगों का ये समूह जो 40 से 100 फीसदी तक दिव्यांग हैं लेकिन आज हर किसी के लिए उदाहरण हैं। आज ये अपनी दिव्यांगता को कोस नहीं रहे बल्कि राशन वितरण प्रणाली का बेहतर तरीके से संचालन कर एक अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। समूह के अध्यक्ष विनोद पाण्डेय (39 वर्ष) जिन्हें आँखों से बिलकुल दिखाई नहीं पड़ता। वो दूसरों के सहारे हाथ पकड़ कर चलते हैं। पर आज उनमें ये बताते हुए आत्मविश्वास था, "हमें दिखाई भले ही नहीं पड़ता लेकिन इन मित्रों की मदद से ये दुकान चला लेते हैं। कहीं आना-जाना होता है तो इनकी मदद से चले जाते हैं। हमारे समूह को कई लोग देखने आते हैं। हर कोई हमारे समूह का हौसला बढ़ाता है इससे हम लोगों का उत्साह बढ़ता है।"
वो आगे बताते हैं, "यहाँ गाँव के जो लोग भी राशन लेने आते हैं वो हम सब की जरूरत पड़ने पर मदद कर देते हैं। आज समूह में हमारी खुद की बचत है और खुद का काम भी हो गया है। अब ये राशन की दुकान चलाकर ऐसा नहीं लगता है कि हम खाली बैठे हैं।"

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विनोद की तरह इस समूह में 2 महिला और 9 पुरुष जुड़े हैं जो दिव्यांग हैं। अब ये इस दुकान पर सभी मिलजुलकर काम करते हैं और एक दूसरे के व्यक्तिगत सहयोग के लिए भी हमेशा तत्पर रहते हैं। दुकान और समूह में इनकी बराबरी की हिस्सेदारी है। ये दिव्यांग समूह हजारीबाग जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर डांड़ पंचायत में रहता है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी एवं साईट सेवर के साझा प्रयास से "राष्ट्रीय दिव्यांग समूह' का गठन करके उसमें जुड़ गये। इस दिव्यांग समूह को जुलाई 2018 में जनवितरण प्रणाली की दुकान दिलाई गयी जिससे ये अपनी आजीविका को मजबूत कर सकें। ये महीने में हर सदस्य 50 रुपए जमा करते हैं। वक़्त जरूरत पड़ने पर समूह से उधार ले लेते पर किसी के आगे हाथ नहीं फैलाते।
गाँव में रह रहे दिव्यांग ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त करने की पहल से दिव्यांगों के लिए काम कर रही संस्था साइट सेवर संस्था ने वर्ष 2015 में झारखंड ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के साझा प्रयास से इन दिव्यांगों के स्वयं सहायता समूह बनाने की शुरुआत की। झारखंड में अबतक 800 से ज्यादा दिव्यांगों के स्वयं सहायता समूह बन चुके हैं। जो हजारीबाग समूह की तरह विभिन्न तरह के काम कर रहे हैं। इनमे से कोई समूह जूट का सामान बनाता तो कैटरिंग का काम करता इनमे से कोई ईरिक्शा चलाता। कुछ बकरी पालन करते तो कईयों ने लोन लेकर खुद की दुकान खोल ली है।

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