करीब ७० साल पहले चीन ने की थी कोरोना जैसी महामारी की गलती एक ही झटके में चली गयी थी लाखों जाने, जानकर रह जाओगे दंग

ये बात 1958 की है. तब चीन की सत्ता संभाल रहे थे माओ जेडॉन्ग, जिन्हें माओ से-तुंग भी कहा जाता है. उन्होंने एक अभियान शुरू किया था, जिसे ‘फोर पेस्ट कैंपेन’ के नाम से जाना जाता है. इस अभियान के तहत उन्होंने चार जीवों (मच्छर, मक्खी, चूहा और गौरैया चिड़िया) को मारने का आदेश दे दिया था.

 उनका कहना था ये चारों जीव किसानों की मेहनत बेकार कर देते हैं, खेतों में मौजूद उनके सारे अनाज खा जाते हैं. अब चूंकि मच्छर, मक्खी और चूहों को मारना थोड़ा मुश्किल काम था, क्योंकि वो आसानी से खुद को कहीं छुपा लेते थे, लेकिन गौरैया चिड़ियों की तो आदत है कि वो हमेशा इंसानों के बीच ही रहना पसंद करती हैं. लिहाजा वो माओ जेडॉन्ग के आदेश का शिकार बन गईं और पूरे चीन में उन्हें ढूंढ-ढूंढकर मारा जाने लगा. यहां तक कि उनके घोंसलों को भी उजार दिया गया, ताकि कोई जिंदा न बच पाए.

लोग बर्तन, टिन या ड्रम बजा-बजाकर गौरैया को उसकी जगह से उड़ाते और उसे तब तक कहीं बैठने नहीं देते, जब तक कि वह उड़ते-उड़ते थक न जाए और आसमान से ही गिर कर मर न जाए. इतना ही नहीं, जो व्यक्ति जितनी संख्या में गौरैया मारता था, उसे उतना ही बड़ा इनाम भी दिया जाता था. इस लालच में चीनी लोग वो कर बैठे, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की हो.   साल 1960 में माओ जेडॉन्ग ने गौरैया को मारने का अपना इरादा तब बदल दिया, जब चीन के ही एक मशहूर पक्षी विज्ञानी शो-शिन चेंग ने उन्हें बताया कि गौरैया बड़ी संख्या में अनाज के साथ-साथ उन्हें नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े भी खा जाती हैं.
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