ना तो समय पर एम्बुलेंस मिली ना ही इलाज, गरीब पिता की गोद में ही बेटी ने तोड़ दिया दम, सामने आई डॉक्टर की लापरवाही

राम बहोर ने कहा कि, उसकी बेटी की तबीयत खराब थी, उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही। उसके फेफड़े सांस लेने में आवाज कर रहे थे। लॉकडाउन के कारण कोई वाहन नहीं मिल रहा था, इसलिए सुबह 6 बजे उसने 108 एम्बुलेंस बुलाने के लिए फोन किया।

 बार-बार फोन करता रहा और हर बार उसे यही जवाब मिलता रहा कि एम्बुलेंस 10 मिनट में पहुंच रही है। जब एम्बुलेंस पहुंची तब तक दोपहर के 12 बज चुके थे और बेटी की हालत और बिगड़ चुकी थी। किसी तरह जब बेटी को लेकर वह जिला अस्पताल पहुंचा तो वहां देखने के लिए डॉक्टर नहीं मिले। अस्पताल में भटकता रहा, इस बीच बेटी ने दम तोड़ दिया।

और फिर एक मासूम की जान बस इसलिए चली गई क्युकी उसे समय पर एम्बुलेंस नहीं मिली तथा समय पर डॉक्टर नहीं मिला। लेकिन बेटी की मौत के बाद भी राम बहोर के दु:ख का अंत नहीं हुआ। अस्पताल से बेटी का शव गोद में उठाए राम बहोर को पैदल ही अपने गांव गौहारी निकलना पड़ा। न तो अस्पताल में किसी ने उसके जाने का इंतजाम किया और न ही उसके पास कोई और विकल्प नहीं था। रोता बिलखता, भूखा प्यासा पिता अपनी मासूम लाड़ली का शव गोद मे उठाए शहर की सड़कों पर चलता रहा।
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